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सूद वंश के इतिहास का संक्षिप्त विवरण्


सूद मूल रूप से एक क्षत्रिय समुदाय (अग्निकुल सोधा क्षत्रिय वंशज) हैं लेकिन परम्परागत रूप से अधिकांश व्यापारी हैं। भारत में वे ज्यादातर हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाण, राजस्थान, जम्मू कश्मीर और उत्तरी भारत के अन्य क्षेत्रों में हैं। सूद शब्द संस्कृत के तीन अक्षरों सू$अत$अ से बना है जिसका अर्थ श्रेष्ठ आचरण करके उन्नति करना है। अमरकोश के मुताबिक संस्कृत में ‘‘सूद’’ शब्द का अर्थ ‘‘दुश्मनों का विजेता’’ है। सूद राजा परमार के दूसरे पुत्र को दिया गया नाम था, जिसे अमरक साम्राज्य (या उस समय उमरकोट) दिया गया था। राजा सूद की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मांजन राव सिंहासन पर आसीन हुए। मांजन राव के बाद बाचीरा राव, रीज राव, अनिरूद्ध और अनाराव ने शासन किया था। इस अवधि के दौरान कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं हुआ और सूद ने पट्टन पर निर्विवाद शासन किया। अनाराव की मौत पर उनके बेटों और रिश्तेदारों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध छिड़ा जिसमें राजा किन राव विजयी हुए और सिंहासन पर कब्जा कर लिया। हालांकि स्पष्ट रूप से उत्तराधिकार का सवाल तय किया गया था लेकिन सतह के नीचे बहुत नाराजगी थी। हिंसा और युद्ध फिर शुरू हुआ राजा किन राखा गंधल की अध्यक्षता में भयंकर लड़ाई हुई जिसके बाद राजा किन राव उनके आठ भाइयों के साथ मारे गए और राजा किन राखा गंधल ने युद्ध जीता। राजा किन राव और उनके आठ बेटों की मौत के पर उनके शेष परिवार के सदस्यों और कुछ अन्य रिश्तेदारों ने पट्टन छोड़ दिया और मारू (राजस्थान) देश को चले गए। इस प्रकार महाराज सूद के वंशज दो समूहों में विभाजित हो गए। एक का नेतृत्व गंधल पट्टन में रहा और दूसरे का मारू देश में। गंधल और उनके बेटों ने लगभग 50 वर्षों तक पट्टन पर शासन किया। यादव और अमरावली के राजाओं ने उन पर हमला किया और वे सभी पराजित हो गए और मारे गए। इस प्रकार सूद शासकों ने पट्टन खो दिया। जो लोग जीवित बचे वे गंगा और यमुना की घाटियों में चले गए और वहां बस गए। राजा किन राव के पुत्रों ने मारवाड़ के एक बड़े क्षेत्र पर विजय प्राप्त की और अमरकोट के साथ अपनी राजधानी के रूप में शासन शुरू कर दिया। राजा किन राव के बेटे जचक राव और पोते तिरी राव इस क्षेत्र में अपनी पकड़ स्थापित करने में सक्षम रहे। तिरी राव के पुत्र राणा जगदेव ने अपने राज्य को पूरे सिंध ओर पंजाब के एक बड़े हिस्से तक कश्मीर समेत पंजाब से कराची तक और सतलुज नदी से लेकर सिंधु तक बढ़ाया। उन्होंने अपनी राजधानी अमरकोट से अलवर में स्थानान्तरित कर दी।
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संस्थापक एवं पूर्व प्रधान

स्वर्गीय लाला देवराज जी सूद (भागड़ा)
लोहारा जिला ऊना हिमाचल प्रदेश

स्वर्गीय श्रीमती रोशनी देवी सूद

इंदरपुरी न्यू दिल्ली
जिन्होंने जठेरी माता कंपलेक्स के लिए अपने पिता स्वर्गीय श्री रामदितामल सूद (भागड़ा) द्वारा दी गई पूरी जमीन दान स्वरूप दी |

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